धरना स्थल पर इससे पहले भूपेश बघेल भी पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया। कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी के बाद विश्रामपुर का आंदोलन अब प्रदेश की बड़ी राजनीतिक लड़ाई में बदलता नजर आ रहा है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, सूरजपुर जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन के खिलाफ शिवनंदनपुर नगर पंचायत चुनाव के दौरान हुए विवाद में पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है और इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।
कांग्रेस का यह भी आरोप है कि नरेंद्र जैन के घर जाकर विवाद करने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के खिलाफ कई बार शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की है। इसी मुद्दे को लेकर 25 मई को प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज सहित कांग्रेस पदाधिकारी विश्रामपुर थाने पहुंचे थे।


पुलिस की अनदेखी के बाद शुरू हुआ धरना
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पुलिस प्रशासन ने उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया, जिसके बाद थाने के सामने ही अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया गया। देर रात करीब 2:30 बजे तक टीएस सिंहदेव स्वयं धरना स्थल पर मौजूद रहे और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते रहे। सोमवार सुबह से ही वे फिर धरना स्थल पर डटे रहे।
आंदोलन ने पकड़ा राजनीतिक रंग
प्रदेश के बड़े नेताओं के धरने में शामिल होने के बाद मामला अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस इसे “एकतरफा पुलिस कार्रवाई” बता रही है, जबकि भाजपा की ओर से अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
धरना स्थल पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है और प्रशासन की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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