फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, मंगलवार 3 मार्च को वर्ष 2026 का पहला और सबसे बड़ा खंडग्रास चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा तथा भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में दृश्य होने के कारण इसका सूतक काल मान्य रहेगा।
सूतक और ग्रहण का समय
- सूतक काल प्रारंभ – सुबह 9:31 बजे
- चंद्रग्रहण प्रारंभ – शाम 6:07 बजे
- चंद्रग्रहण समाप्त – शाम 6:47 बजे
- सूतक समाप्त – शाम 6:47 बजे
- ग्रहण की अवधि लगभग 40 मिनट (6:07 से 6:47 बजे) रहेगी। इसी दिन शाम 5:07 बजे होलाष्टक भी समाप्त हो जाएगा।
सूतक काल में क्या न करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में पूजा-अर्चना, मूर्तियों का स्पर्श, नए या शुभ कार्यों की शुरुआत, भोजन बनाना या करना तथा यात्रा करना वर्जित माना जाता है। मंदिरों के पट भी इस दौरान बंद रहेंगे।
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
क्या करें?
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक ग्रहण काल में अपने ईष्ट मंत्र या गुरु मंत्र का जप करने से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान-दान का विशेष महत्व बताया गया है।
इन राशियों को रहना होगा सावधान
- मेष – खर्चों में वृद्धि, बचत में कठिनाई।
- कर्क – आर्थिक हानि और व्यापार में नुकसान की आशंका।
- सिंह – स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, चोट या विवाद से बचें।
- वृश्चिक – मानसिक तनाव और करियर में चुनौतियां, उधार लेन-देन से बचें।
- मीन – कार्यों में बाधा, पारिवारिक तनाव, अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता।

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