कौन बनेगा छत्तीसगढ़ वन विभाग का नया मुखिया ! इन तीन आईएफएस अधिकारियों के नामों की चर्चा जोरों पर..

पी. कुमार । रायपुर/

राज्य के जंगल महकमें में इस माह बड़ा बदलाव नजर आएगा। विभाग को इस माह नया वन बल प्रमुख मिल जाएगा। मौजूदा वन बल प्रमुख वी. श्रीनिवास राव इसी माह सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इधर वन महकमें के नए मुखिया के तौर पर वरिष्ठता क्रम में आने वाले तीन आईएफएस अफसर स्वाभाविक दौड़ में नजर आ रहे हैं। राज्य सरकार ने भी इस मामले में अफसरों के कामकाज के आधार पर मंथन शुरू कर दिया है। इसके बावजूद श्रीनिवास राव के बेहतर कामकाज के मद्देनजर उन्हें एक्सटेंशन भी दिए जाने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा रहा है। ऐसी चर्चा है कि वरीयता क्रम वाले दोनों अफसरों में से किसी एक नाम पर सहमति नहीं बनी तो सेवावृद्धि दी जा सकती है। 


वन बल प्रमुख श्रीनिवास राव की सेवानिवृत्ति के बाद नए मुखिया के चयन के मामले में विकल्प पर रायशुमारी तेज हो गई है। हालांकि इस पर मुख्यमंत्री ही अंतिम निर्णय करेंगे। इधर नए वन बल प्रमुख को लेकर वरिष्ठ अफसरों के नाम चर्चा में हैं। इनमें भारतीय वन सेवा के 1992 बैच के अफसर अरुण पांडे और 1994 बैच के अधिकारी कौशलेंद्र कुमार और 1995 बैच के अफसर ओपी यादव में से किसी एक नाम पर ही मुहर लग सकती है। वरिष्ठता क्रम में कुछ अन्य आईएफएस भी शामिल हैं लेकिन उनकी सेवानिवृत्ति करीब है। इनमें आईएफएस तपेश झा आगामी जून माह में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इसी तरह वरिष्ठ आईएफएस अनिल साहू भी जुलाई माह में सेवानिवृत्त

हो जाएंगे। वहीं 1994 बैच के आईएफएस प्रेम कुमार भी जुलाई में और ओपी यादव आगामी वर्ष 2027 को फरवरी माह में सेवानिवृत्त होंगे। पीसीसीएफ स्तर के तीन अफसरों के पद रिक्त होने की स्थिति में वन महकमें में भी एक बड़ी प्रशासनिक सर्जरी होने के संकेत हैं। ऐसी स्थिति में पीसीसीएफ स्तर के अफसरों को वरिष्ठता के आधार पर नई जिम्मेदारी भी दी जाएगी। इधर वरिष्ठ 1997 बैच की आईएफएस संजीता गुप्ता का भी ओहदा बढ़ाया जा सकता है। उनकी सेवानिवृत्ति में अभी कुछ वर्ष बाकी हैं। 

एक्सटेंशन की चर्चा जोरों पर

मौजूदा वन बल प्रमुख श्रीनिवास राव के एक्सटेंशन का मामला अभी विभाग में चर्चा में है। उनके दीर्घ प्रशासनिक अनुभव और बेहतर परफार्मेंस की वजह से ही चर्चाओं ने जोर पकड़ा है। हालांकि इस मामले में अभी राज्य शासन के स्तर पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार इस मामले में विचार कर सकती है। 

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