मिली जानकारी के अनुसार, एसएफआई से जुड़े गर्व गभने, गौरव गुप्ता और दुष्यंत साहू द्वारा की गई शिकायत के आधार पर आयोग ने जांच प्रक्रिया प्रारंभ की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डॉ. भूपेन्द्र कुमार कुलदीप को भारती विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की गई पीएचडी उपाधि नियमों के अनुरूप नहीं है। मामले की सुनवाई के लिए 25 मई को दोपहर 1 बजे आयोग कार्यालय में बैठक निर्धारित की गई है। आयोग द्वारा गठित जांच समिति में डॉ. व्यास दुबे को संयोजक, डॉ. एस. के. गुप्ता तथा डॉ. एम. एल. नायक को सदस्य बनाया गया है। समिति शिकायत से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों की जांच करेगी।
एसएफआई ने उठाए गंभीर सवाल
एसएफआई के रायपुर जिलाध्यक्ष गर्व गभने, जिलासचिव हर्ष संघाणी और गौरव गुप्ता ने संयुक्त विज्ञप्ति जारी कर मामले में कई सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि इस प्रकरण में विनियामक आयोग स्वयं भी एक पक्ष के रूप में सामने आता है, इसलिए आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित निजी विश्वविद्यालय को स्थापना के तुरंत बाद पीएचडी उपाधि प्रदान करने की अनुमति किस आधार पर दी गई। एसएफआई नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि विश्वविद्यालय की स्थापना संबंधी अधिसूचना जारी होने के साथ ही पीएचडी अधिनियम कैसे लागू हो गया, जबकि सामान्यतः किसी विश्वविद्यालय को पहली डिग्री जारी करने के लिए कम से कम तीन वर्षों की शैक्षणिक प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। संगठन ने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।

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