करियर एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज के दौर में छात्रों के सामने करियर के कई विकल्प मौजूद हैं। इसी वजह से कन्फ्यूजन भी बढ़ रहा है। कई छात्र समाज, दोस्तों या रिश्तेदारों के प्रभाव में आकर फैसला लेने लगते हैं, जबकि सही करियर वही होता है जिसमें बच्चे की रुचि और क्षमता दोनों हों।
विशेषज्ञों के मुताबिक पेरेंट्स को सबसे पहले बच्चे की पसंद, उसकी स्किल और लंबे समय के लक्ष्य को समझना चाहिए। अगर बच्चा इंजीनियरिंग और UPSC दोनों में रुचि दिखा रहा है, तो उसे अलग-अलग फील्ड की सही जानकारी दें। कई छात्र ग्रेजुएशन के साथ UPSC की तैयारी भी करते हैं।
करियर काउंसलर्स का मानना है कि बच्चों पर तुरंत फैसला लेने का दबाव नहीं डालना चाहिए। उन्हें समय देकर अलग-अलग करियर विकल्पों को एक्सप्लोर करने का मौका देना चाहिए। सही गाइडेंस और खुली बातचीत बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाती है और वे बेहतर निर्णय ले पाते हैं।

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