प्रभावित शिक्षकों का आरोप है कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में कई जगह मनमानी की गई। कुछ शिक्षकों को उनके मूल स्थान से सैकड़ों किलोमीटर दूर पदस्थ कर दिया गया, जबकि कई मामलों में वरिष्ठता और विषयवार नियमों की अनदेखी हुई है।
शिक्षकों ने बताया कि उन्होंने जिला शिक्षा विभाग से लेकर लोक शिक्षण संचालनालय तक अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं, लेकिन अब तक किसी स्तर पर ठोस समाधान नहीं निकला। मामले को लेकर कुछ शिक्षक कोर्ट भी पहुंचे थे, जहां शासन को आवेदन निराकरण के निर्देश दिए गए थे।
इधर शासन ने स्कूल जॉइन नहीं करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। इससे शिक्षकों में असंतोष और बढ़ गया है। प्रभावित शिक्षकों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का निष्पक्ष निराकरण नहीं होगा, तब तक वे राहत की उम्मीद में संघर्ष जारी रखेंगे।
शिक्षा विभाग के इस फैसले को लेकर प्रदेशभर में चर्चा तेज है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।

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