बेहतर खबर - निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर सख्ती: बुक-यूनिफॉर्म की शिकायतों की जांच करेंगे कलेक्टर और GST अफसर

रायपुर, 21 मई 2026। छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वृद्धि और पालकों को तय दुकानों से पुस्तकें, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे व अन्य सामग्री खरीदने के लिए मजबूर किए जाने की शिकायतों पर अब राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिलों में निगरानी और जांच समितियों का गठन कर दिया है। खास बात यह है कि पहली बार इन समितियों में जीएसटी अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।
जिला स्तरीय निगरानी समिति में कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और सहायक आयुक्त जीएसटी को सदस्य बनाया गया है। वहीं विकासखंड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), विकासखंड शिक्षा अधिकारी और जीएसटी इंस्पेक्टर जांच समिति में शामिल रहेंगे।
दरअसल, निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर नियंत्रण के लिए राज्य शासन ने वर्ष 2020 में “छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन विधेयक” लागू किया था। इसके तहत स्कूल, जिला और राज्य स्तर पर फीस समितियों के गठन का प्रावधान भी किया गया था। इसके बावजूद कई निजी स्कूल तय नियमों से अधिक फीस बढ़ाने और पालकों पर विशेष दुकानों से सामग्री खरीदने का दबाव बना रहे थे।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को फीस समितियों को सक्रिय करने तथा नियम विरुद्ध फीस बढ़ाने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह के निर्देश पर अब विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। शिक्षा सचिव ने स्पष्ट कहा है कि निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी से जुड़ी शिकायतों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए “छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन विधेयक-2020” के तहत कार्रवाई की जाए।

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