रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में गुरुवार देर रात मुख्यमंत्री निवास पर हुई अहम बैठक ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री निवास में आयोजित बैठक में केंद्रीय संगठन ने मंत्रियों को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार के कामकाज को लेकर जनता में किसी भी प्रकार का असंतोष स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बैठक में मंत्रियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने विभागों के सचिवों और प्रभार वाले जिलों के कलेक्टरों के साथ नियमित समन्वय बनाकर जनता से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। सूत्रों का दावा है कि मंत्रियों को दो महीने का समय दिया गया है और इसके बाद उनके कामकाज की दोबारा समीक्षा होगी। यदि अपेक्षित सुधार नहीं दिखा तो संगठन आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकता है।
सूरजपुर की घटना पर जताई नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में हाल ही में हुई सूरजपुर की घटना पर भी गंभीर चर्चा हुई। केंद्रीय नेतृत्व ने इस मामले पर नाराजगी जताते हुए मंत्रियों को भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सतर्क रहने और समय रहते आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
CM हाउस में बैठक क्यों?
आमतौर पर संगठन और सरकार से जुड़ी समन्वय बैठकें भाजपा कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में होती हैं। लेकिन इस बार बैठक मुख्यमंत्री निवास में आयोजित की गई। सूत्रों के अनुसार, इसका उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों तक सख्त संदेश पहुंचाना और विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करना था।
गोपनीय रखने के निर्देश
बैठक में मौजूद मंत्रियों को यह भी निर्देश दिए गए कि बैठक की आंतरिक चर्चा सार्वजनिक न की जाए। यही वजह रही कि बैठक के बाद अधिकांश मंत्रियों ने मीडिया से केवल इतना कहा कि यह सत्ता और संगठन के बीच समन्वय बैठक थी और ऐसी बैठकें समय-समय पर होती रहती हैं।

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