कुलपति ने बताया कि मौजूदा प्रिंटेड स्टॉक समाप्त होने के बाद नई अंकसूचियों और डिग्रियों में यह परिवर्तन दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भारतीय संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
प्रो. चक्रवाल ने 2023 में भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्वारा आधिकारिक निमंत्रण में ‘भारत’ शब्द का प्रयोग किया गया था। उन्होंने कहा कि जब देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद इस परंपरा को अपनाता है, तो विश्वविद्यालय भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ‘भारत’ शब्द भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है, जबकि ‘इंडिया’ नाम विदेशी प्रभाव से प्रचलन में आया। विश्वविद्यालय का उद्देश्य देश की पारंपरिक पहचान को अधिक प्रमुखता देना है।
हालांकि, राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों ने अभी तक ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है। रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और बिलासपुर के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनके संस्थानों को इस संबंध में कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं और फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है।

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