मामले का खुलासा तब हुआ जब टॉवर संचालित करने वाली कंपनी के अधिकारी वर्षों से बंद पड़े टॉवर की मरम्मत के लिए मौके पर पहुंचे। वहां पहुंचते ही उनके होश उड़ गए। जिस स्थान पर कभी विशाल मोबाइल टॉवर खड़ा था, वहां उसका कोई निशान तक नहीं मिला।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले 15-20 दिनों से टॉवर वहां दिखाई नहीं दे रहा था। हालांकि लोगों को लगा कि कंपनी ने खुद ही टॉवर हटाया होगा। लेकिन जब कंपनी के अधिकारियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ।
यह घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि बिहार में पहले भी डीजल इंजन और लोहे के पुल तक चोरी होने की घटनाएं सुर्खियां बटोर चुकी हैं। अब 132 फीट ऊंचे मोबाइल टॉवर की चोरी ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर इतने बड़े टॉवर को किस तरह और कब गायब किया गया।

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