आरक्षण पर नई बहस तेज, SC ने कहा- उच्च पदस्थ अधिकारियों के बच्चों को आय की परवाह किए बिना बाहर रखा जा सकता है

नई दिल्ली, 23 मई 2026. पिछड़े वर्गों में आर्थिक और शैक्षणिक रूप से संपन्न परिवारों को आरक्षण का लाभ दिए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि जो परिवार आरक्षण का लाभ लेकर सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत हो चुके हैं, उन्हें धीरे-धीरे आरक्षण व्यवस्था से बाहर आने पर विचार करना चाहिए।
Supreme Court of India की जस्टिस B V Nagarathna और जस्टिस Ujjal Bhuyan की पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि यदि माता-पिता दोनों या इनमें से कोई एक IAS अधिकारी है, तो उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ क्यों मिलना चाहिए।
कर्नाटक के उम्मीदवार का मामला
यह मामला Karnataka के एक उम्मीदवार से जुड़ा है, जिसे Karnataka Power Transmission Corporation Limited में आरक्षित श्रेणी के तहत सहायक अभियंता पद के लिए चुना गया था।
हालांकि जिला जाति एवं आय सत्यापन समिति ने उसे क्रीमी लेयर में मानते हुए जाति वैधता प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार कर दिया। समिति का कहना था कि उम्मीदवार के माता-पिता सरकारी कर्मचारी हैं और उनकी संयुक्त आय निर्धारित सीमा से अधिक है।
EWS को लेकर भी कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि EWS श्रेणी केवल आर्थिक कमजोरी से जुड़ी है, जबकि सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन अलग विषय है। उन्होंने कहा कि जब कोई परिवार आरक्षण का लाभ लेकर एक निश्चित सामाजिक और आर्थिक स्तर तक पहुंच चुका हो, तब व्यवस्था में संतुलन जरूरी हो जाता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगस्त 2024 में आए State of Punjab vs Davinder Singh Judgment के फैसले में SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने संबंधी टिप्पणी केवल एक मत थी और अंतिम निर्णय विधायिका को लेना है।
OBC क्रीमी लेयर की वर्तमान सीमा
फिलहाल OBC वर्ग के लिए क्रीमी लेयर की आय सीमा 8 लाख रुपये सालाना निर्धारित है। हालांकि उच्च संवैधानिक पदों, वरिष्ठ नौकरशाहों और शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बच्चों को आय की परवाह किए बिना आरक्षण श्रेणी से बाहर रखा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

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