दरअसल, शासन ने 5 जून 2025 से सभी प्रकार के अटैचमेंट समाप्त करने के आदेश जारी किए थे। निर्देश था कि जिला शिक्षा कार्यालय, समग्र शिक्षा और विकासखंड कार्यालयों में कार्यरत शिक्षक और व्याख्याता स्कूलों में लौटकर शिक्षण कार्य करें। इसके बावजूद कई प्राचार्यों और शिक्षकों ने अधिकारियों से सांठगांठ कर ऑफिसों में ही अटैचमेंट जारी रखा।
रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार और दुर्ग समेत कई जिलों में ऐसे मामलों की शिकायतें सामने आई हैं। धमतरी जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जोरातराई में पदस्थ प्राचार्य अजय कुमार देशपांडे ने प्रमोशन के बाद स्कूल जॉइन किया, लेकिन कुछ ही घंटों में उन्हें समग्र शिक्षा कार्यालय में अटैच कर दिया गया। आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी ने शासन के आदेश को नजरअंदाज करते हुए यह कार्रवाई की।
इसी तरह रायपुर में प्राचार्य शिशिर तिवारी को पीएमश्री स्कूल कूंरा धरसींवा में पदस्थ किया गया था, लेकिन कुछ सप्ताह बाद कलेक्टर के आदेश पर उन्हें सहायक जिला परियोजना अधिकारी बनाकर DEO कार्यालय में अटैच कर दिया गया।
बलौदाबाजार जिले में भी बड़ा मामला सामने आया है। एक जनप्रतिनिधि ने DPI को पत्र लिखकर बताया कि जिले में करीब 20 से 25 शिक्षक और व्याख्याता जिला एवं विकासखंड कार्यालयों में अटैच हैं। इनमें कौशिक मुनी त्रिपाठी, ऋतु शुक्ला, अरुण वर्मा, एम. ब्रह्मणी, जहीर अब्बास और रिया जायसवाल के नाम शामिल बताए गए हैं। जिला लाइब्रेरी में भी पांच सहायक शिक्षक संलग्न हैं।
शिक्षा विभाग के भीतर यह चर्चा तेज है कि वर्षों से स्कूलों से दूर रहने वाले कई शिक्षक अब नियमित शिक्षण कार्य करने में भी असहज महसूस कर रहे हैं। वहीं स्कूलों में शिक्षकों और प्राचार्यों की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।

Comments