जानकारी के मुताबिक अब छात्रों को कार्यानुभव शुल्क, विज्ञान निधि, खेलकूद निधि, परीक्षा शुल्क और विकास समिति शुल्क जैसे कई मदों में भुगतान करना होगा। हाईस्कूल स्तर पर लगभग 445 रुपए और हायर सेकेंडरी स्तर पर करीब 550 रुपए तक फीस निर्धारित की गई है। इसके अलावा शाला विकास समिति द्वारा भी लगभग 1000 रुपए तक अतिरिक्त शुल्क लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि शिक्षा विभाग ने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई पहले की तरह निशुल्क रखने की बात कही है। लेकिन नौवीं से बारहवीं तक पढ़ने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों पर इसका सीधा आर्थिक असर पड़ेगा।
साल 2019 में शुरू हुई स्वामी आत्मानंद योजना का उद्देश्य गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को बेहतर अंग्रेजी माध्यम शिक्षा उपलब्ध कराना था। अब फीस लागू होने के फैसले के बाद विपक्ष और अभिभावकों ने सरकार पर शिक्षा को महंगा बनाने का आरोप लगाया है।
अभिभावकों का कहना है कि पहले ही निजी स्कूलों की फीस और महंगाई से लोग परेशान हैं, ऐसे में सरकारी मॉडल स्कूलों में भी फीस वसूली से आर्थिक बोझ और बढ़ेगा। वहीं शिक्षा विभाग का तर्क है कि स्कूलों के बेहतर संचालन और सुविधाओं के विस्तार के लिए यह निर्णय लिया गया है।

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