नई व्यवस्था के अनुसार स्कूलों के बजट, विकास कार्य, शिक्षा गुणवत्ता, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं पर अब पेरेंट्स की अहम भूमिका होगी। केंद्र सरकार का उद्देश्य स्कूलों में पारदर्शिता बढ़ाना और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है।
गाइडलाइन के मुताबिक स्कूल मैनेजमेंट कमेटी में 75 प्रतिशत सदस्य अभिभावक होंगे, जबकि महिलाओं की भागीदारी कम से कम 50 प्रतिशत रखी जाएगी। समिति को स्कूल निर्माण, पेयजल, शौचालय, छात्रों की सुविधाएं और शिक्षा सुधार से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार मिलेगा।
सरकार ने स्कूलों के लिए तीन साल की विकास योजना तैयार करने का निर्देश भी दिया है। इसके तहत स्कूलों की जरूरतों, आधारभूत सुविधाओं और शिक्षा गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा। समिति हर महीने बैठक करेगी और स्कूलों की गतिविधियों की समीक्षा भी करेगी।
नई व्यवस्था में पर्यावरण, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है। स्कूल परिसरों को सुरक्षित और स्वच्छ बनाने के साथ-साथ बच्चों के लिए बेहतर शिक्षण वातावरण तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों की सीधी भागीदारी से सरकारी स्कूलों में जवाबदेही बढ़ेगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलेगा।

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