दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के अनियंत्रित संचालन से पारंपरिक मेडिकल व्यापार प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही नकली दवाओं की बिक्री, बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाएं उपलब्ध होना और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
रायपुर जिला दवा विक्रेता संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी GSR 817 और GSR 220 अधिसूचनाओं को वापस लेने की मांग लंबे समय से की जा रही है। उनका आरोप है कि ई-फार्मेसी कंपनियां नियमों का उल्लंघन कर कारोबार कर रही हैं, जिससे छोटे और मध्यम दवा व्यापारियों का अस्तित्व संकट में पड़ गया है।
इस बंद को चेंबर ऑफ कॉमर्स ने भी समर्थन दिया है। वहीं, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने आम जनता की सुविधा के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए हैं। प्रशासन के अनुसार सरकारी अस्पतालों, जनऔषधि केंद्रों, धनवंतरी मेडिकल स्टोर्स और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में दवाएं उपलब्ध रहेंगी ताकि मरीजों को परेशानी न हो।
दवा व्यापारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल व्यापार नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। यदि सरकार जल्द समाधान नहीं निकालती, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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