नवरतन जायसवाल की नियुक्ति वर्ष 2011 में शिक्षाकर्मी वर्ग-1 के पद पर हुई थी। नियुक्ति के दौरान उन्होंने आवेदन पत्र में दो से अधिक जीवित संतान होने की जानकारी को छिपाया था। जांच में यह तथ्य सामने आया कि उनके कुल चार जीवित संतान हैं, जिनमें से दो बच्चों का जन्म 26 जनवरी 2001 के बाद हुआ है।
नियमों के अनुसार, यदि किसी उम्मीदवार की दो से अधिक जीवित संतान हैं और तीसरी संतान का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है, तो उसकी नियुक्ति अमान्य मानी जाती है। इस नियम के उल्लंघन और सेवा शर्तों के गंभीर उल्लंघन को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने 3 अप्रैल 2025 को आदेश जारी कर नवरतन जायसवाल को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक कर दिया।

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