नई दिल्ली। Supreme Court of India ने वैवाहिक और पारिवारिक विवादों में आपराधिक कानूनों के कथित दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि कई मामलों में लोग निजी दुश्मनी निकालने, दबाव बनाने या समझौते के लिए कानून का सहारा लेकर जीवनसाथी और उसके रिश्तेदारों को परेशान करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे मामलों में अदालतों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
Justice B. V. Nagarathna और Justice Ujjal Bhuyan की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। अदालत ने 14 वर्षीय किशोरी से जुड़े दुष्कर्म के आरोपों वाली शिकायत को खारिज करते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का उपयोग व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
अदालतों पर बढ़ रहा बोझ
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक और व्यावसायिक विवादों में कई बार पक्षकार एक-दूसरे के खिलाफ झूठे या बेबुनियाद आपराधिक मामले दर्ज कराते हैं। इससे न केवल न्यायिक व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है, बल्कि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने में भी देरी होती है।
अदालत ने कहा कि ऐसे मुकदमे कभी-कभी समझौते, आर्थिक लाभ या प्रतिशोध के उद्देश्य से दायर किए जाते हैं, जिससे न्याय व्यवस्था का दुरुपयोग होता है।
असली मामलों पर पड़ता है असर
पीठ ने स्पष्ट किया कि दुष्कर्म, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा तथा यौन शोषण जैसे अपराध बेहद गंभीर हैं और इनके आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन झूठे और बेबुनियाद मामलों की बढ़ती संख्या के कारण कई बार वास्तविक और गंभीर मामलों की सुनवाई भी प्रभावित होती है।
अदालतों को दी यह सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायालयों की जिम्मेदारी है कि वे प्रत्येक मामले की सावधानीपूर्वक जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि वास्तविक अपराधों और प्रतिशोध की भावना से दर्ज किए गए मामलों में स्पष्ट अंतर किया जाए।
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