आयोग से मंजूरी मिलते ही उपभोक्ताओं को ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त बिजली का भुगतान उनके आगामी बिजली बिलों में क्रेडिट के रूप में दिखाई देगा। नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत पहले सोलर संयंत्र से उत्पन्न बिजली का उपयोग उपभोक्ता की मासिक खपत में समायोजित किया जाता है। इसके बाद बची हुई बिजली ग्रिड में भेजी जाती है, जिसका निर्धारित दर के अनुसार भुगतान किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी के अधिकारियों के अनुसार यह व्यवस्था न केवल उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कमी लाएगी, बल्कि सोलर ऊर्जा अपनाने के लिए लोगों को और अधिक प्रोत्साहित करेगी। इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ राज्य में ऊर्जा आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी।

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