संस्कृति और धर्म: उत्तराखंड के 'जागेश्वर धाम' के जीर्णोद्धार का काम पूरा, श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं का तोहफा

अल्मोड़ा/देहरादून:
उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित 125 से अधिक प्राचीन मंदिरों के समूह 'जागेश्वर धाम' के महा-जीर्णोद्धार और मास्टरप्लान का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। पांचवीं से अठाहरवीं सदी के बीच बने इन ऐतिहासिक शिव मंदिरों के संरक्षण के साथ-साथ अब यहाँ आने वाले शिवभक्तों के लिए विश्व स्तरीय सुविधाएं शुरू कर दी गई हैं।

क्या हुआ है बदलाव? (The Transformation)
 
केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त 'मानसखंड मंदिर माला मिशन' के तहत इस पूरे परिसर को नया रूप दिया गया है:
मूल वास्तुकला से कोई छेड़छाड़ नहीं: केदारनाथ और बद्रीनाथ की तर्ज पर ही, जागेश्वर धाम के मुख्य मंदिर परिसर की प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए सिर्फ उसके आस-पास के ढांचे को सुधारा गया है।
डिजिटल गाइड और होलोग्राफी: यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को इन 125 मंदिरों के इतिहास और धार्मिक महत्व को समझाने के लिए एक अत्याधुनिक डिजिटल इंफो-सेंटर और होलोग्राफिक शो की शुरुआत की गई है।
इको-फ्रेंडली कॉरिडोर: मंदिर के संवेदनशील देवदार के जंगलों को बचाने के लिए पूरे मार्ग को 'नो-प्लास्टिक ज़ोन' और इलेक्ट्रिक वाहन-फ्रेंडली कॉरिडोर में बदल दिया गया है।

सोशल मीडिया पर 'हेरिटेज टूरिज्म' की धूम
 
जैसे ही उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने जागेश्वर धाम की नई और भव्य तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, हैशटैग #JageshwarDham और #Manaskand इंटरनेट पर ट्रेंड करने लगा। देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने प्राचीन धरोहरों को इस तरह सहेजने के प्रयास की जमकर तारीफ की है।

सावन मेले की तैयारियां तेज
 
चूंकि यह काम सावन के महीने से ठीक पहले पूरा हुआ है, इसलिए प्रशासन को उम्मीद है कि इस बार यहाँ रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। मंदिर समिति के मुख्य पुजारी ने बताया, "इस जीर्णोद्धार से न केवल मंदिरों की आयु बढ़ेगी, बल्कि नई पीढ़ी भी हमारे इस प्राचीन अध्यात्म और इतिहास से बेहतर तरीके से जुड़ पाएगी।"

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