सूत्रों के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया के दौरान ही अमित पठानिया की कार्यशैली को लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक कई शिकायतें पहुंची थीं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पहले उन्हें चुनाव प्रक्रिया से अलग किया गया और अब आधिकारिक तौर पर उनकी जिम्मेदारी बदल दी गई है।
बताया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए तैयार की गई 45 हाई परफॉर्मर नेताओं की अंतिम सूची भी विवादों में है। कई जिलों के युवा नेताओं ने आरोप लगाया है कि सक्रिय और योग्य कार्यकर्ताओं को सूची से बाहर रखा गया, जबकि कुछ ऐसे नाम शामिल किए गए हैं जिनकी आयु निर्धारित सीमा से अधिक बताई जा रही है।
रायपुर, दुर्ग, सूरजपुर और अन्य जिलों से भी चयन प्रक्रिया को लेकर नाराजगी सामने आई है। इससे पहले जिला अध्यक्षों के चयन के दौरान भी अमित पठानिया के खिलाफ राजधानी और राजनांदगांव में विरोध प्रदर्शन और पर्चेबाजी हुई थी।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि संगठन चुनाव में पर्दे के पीछे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय भूमिका रही है। हालांकि, सार्वजनिक तौर पर वरिष्ठ नेता चुनाव प्रक्रिया से दूरी बनाए रखने का संदेश देते रहे हैं।
अब नए प्रभारी डॉ. स्मृति रंजन लेंका के सामने चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और विवादमुक्त तरीके से आगे बढ़ाने की बड़ी चुनौती होगी।

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