यह निर्णय हाल ही में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा उठाए गए मुद्दे के बाद लिया गया। बैठक में मंत्री ने पाया कि कई शिक्षक और कर्मचारी अपने मूल विद्यालयों में कार्य करने के बजाय जेडी, डीईओ, बीईओ कार्यालयों सहित अन्य संस्थानों में वर्षों से अटैच हैं, जबकि उनका वेतन मूल विद्यालयों से ही आहरित किया जा रहा है।
डीपीआई ने स्पष्ट किया है कि सभी प्रकार के अनावश्यक संलग्नीकरण समाप्त किए जाएंगे, ताकि शिक्षकों की उपलब्धता स्कूलों में सुनिश्चित हो सके और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। विभाग ने अधिकारियों को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
इस फैसले से लंबे समय से कार्यालयों में अटैच शिक्षकों और कर्मचारियों को अब अपने मूल विद्यालयों में लौटना होगा। माना जा रहा है कि इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी और शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

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