जानकारी के अनुसार, एनईपी के तहत प्रत्येक विद्यार्थी को अपने मूल विषय (डीएससी) के साथ दूसरे संकाय का एक विषय जेनेरिक इलेक्टिव (जीई) के रूप में चुनना अनिवार्य है। शासन के निर्देश हैं कि जीई का प्रश्नपत्र मूल विषय की तुलना में सरल हो, ताकि दूसरे संकाय के छात्रों को कठिनाई न हो।
शिक्षाविदों का आरोप है कि पहले और दूसरे सेमेस्टर में इस व्यवस्था का पालन किया गया, लेकिन अब खर्च कम करने के उद्देश्य से रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय जीई के एटीकेटी छात्रों की परीक्षा मूल विषय (डीएससी) के प्रश्नपत्र से ही ले रहा है। वहीं जिन छात्रों की डीएससी और जीई दोनों में एटीकेटी है, उनके लिए जीई की अलग परीक्षा आयोजित की जा रही है। इससे एक ही विषय की परीक्षा अलग-अलग छात्रों के लिए अलग-अलग तिथियों में ली जा रही है।
बार-बार बदली जा रही परीक्षा समय-सारिणी से छात्र, कॉलेज प्रबंधन और शिक्षक सभी परेशान हैं। शिक्षाविदों का कहना है कि यदि शासन के निर्देशों का सही तरीके से पालन किया जाए तो इस अव्यवस्था से बचा जा सकता है।

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