विधानसभा चुनावों का दौर समाप्त होने और कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया लगभग पूरी होने के बाद कांग्रेस अब संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी में जुट गई है। पार्टी नेतृत्व की नजर वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों पर है। ऐसे में कई राज्यों के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों को बदला जा सकता है, वहीं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में भी नई जिम्मेदारियों का बंटवारा होने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संगठन में नए, सक्रिय और अपेक्षाकृत युवा चेहरों को आगे लाने के पक्ष में हैं। हाल के महीनों में विभिन्न राज्यों में पार्टी के प्रदर्शन, गुटबाजी और आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व संगठनात्मक पुनर्गठन को जरूरी मान रहा है। इस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के बीच कई दौर की चर्चा हो चुकी है।
केरल में बदलाव लगभग तय
केरल कांग्रेस में भी बदलाव लगभग तय माना जा रहा है। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ के राज्य सरकार में मंत्री बनने के बाद संगठन की कमान किसी नए नेता को सौंपे जाने पर विचार चल रहा है। दावेदारों में सांसद कोडिकुन्निल सुरेश, बेनी बेहनान, एंटो एंटनी, वरिष्ठ नेता जोसेफ वाझक्कन और यूडीएफ संयोजक अदूर प्रकाश के नाम चर्चा में हैं।
केरल में जातीय और सामुदायिक संतुलन को लेकर भी बहस तेज हो गई है। एक पक्ष दलित चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की पैरवी कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष ईसाई समुदाय को प्रतिनिधित्व देने की मांग उठा रहा है।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में बदलाव की चर्चा तेज, नए नेतृत्व पर मंथन
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में बदलाव की चर्चा तेज, नए नेतृत्व पर मंथन
पार्टी नेतृत्व 2028 विधानसभा चुनाव और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए ऐसा नेतृत्व सामने लाना चाहती है जो संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय कर सके और विभिन्न गुटों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सके। इसी वजह से कई वरिष्ठ और युवा नेताओं के नाम चर्चा में हैं। संभावित दावेदारों में वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी. एस. सिंहदेव, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत और विधायक उमेश पटेल के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अभी किसी नाम पर आधिकारिक संकेत नहीं दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। कांग्रेस नेतृत्व संगठन में नई ऊर्जा के साथ आगामी चुनावों की तैयारी को धार देने की दिशा में काम कर रहा है।
तमिलनाडु और गोवा में भी बदलाव के संकेत
तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के. सेल्वापरंग थगई के कामकाज को लेकर शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताया जा रहा है। ऐसे में राज्य इकाई में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
वहीं गोवा कांग्रेस में भी संगठनात्मक बदलाव की चर्चा है। प्रदेश अध्यक्ष गिरीश छोड़णकर की पुनर्नियुक्ति को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आई हैं। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गोवा इकाई में नए नेतृत्व को मौका दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
कर्नाटक में नए समीकरणों पर काम
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के बाद संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर नई टीम बनाने की कवायद जारी है। मुख्यमंत्री पद संभालने जा रहे डी.के. शिवकुमार प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका में भी रहे हैं। ऐसे में अब संगठन की कमान किसे मिलेगी, इस पर मंथन जारी है।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने के लिए किसी ओबीसी चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर विचार कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी इस संबंध में दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से लगातार चर्चा कर रहे हैं।
आंध्र प्रदेश में शर्मिला को मिल सकती है नई जिम्मेदारी
आंध्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वाई.एस. शर्मिला को राज्यसभा भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस में शामिल होने के समय उन्हें भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका देने का आश्वासन दिया गया था। ऐसे में संगठन में उनकी जगह नए नेतृत्व को मौका मिल सकता है।
राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी समीक्षा
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा जुलाई 2020 से पद पर हैं, जबकि उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय अगस्त 2023 से संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं। पार्टी नेतृत्व दोनों राज्यों में संगठन के प्रदर्शन की समीक्षा कर रहा है और बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
विशेषकर उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस संगठन को अधिक सक्रिय और आक्रामक बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। समाजवादी पार्टी के साथ संभावित गठबंधन और सीट साझेदारी को लेकर भी कांग्रेस अपनी तैयारी मजबूत करना चाहती है।
2029 को ध्यान में रखकर बनेगी नई टीम
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि आगामी वर्षों में होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए अभी से मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार करना आवश्यक है। इसी रणनीति के तहत राज्यों में नए नेतृत्व, बेहतर समन्वय और युवा चेहरों को आगे लाने पर जोर दिया जा रहा है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में संगठनात्मक बदलावों को अंतिम रूप दिया जा सकता है और कई राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा हो सकती है।


Comments