पहले मामले में शेख निजामुद्दीन का मोबाइल 10 मई को शास्त्री बाजार में गुम हो गया था। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी और पुराना सिम बंद कराकर नया सिम जारी कराया। इसके बावजूद 13 मई को उनके इंडियन ओवरसीज बैंक खाते से पहले 50 हजार और फिर 20 मिनट बाद 29 हजार रुपए निकाल लिए गए।
दूसरी घटना जोरा सब्जी बाजार में हुई, जहां केंद्रीय संयुक्त उपक्रम के महाप्रबंधक उपेंद्र कुमार पांडेय का मोबाइल 16 मई को गुम हो गया। मोबाइल गुम होने के बाद भी साइबर अपराधियों ने 19 मई को उनके खाते से 1.05 लाख रुपए ट्रांसफर कर लिए। दोनों पीड़ितों ने बैंक खातों को तुरंत होल्ड कराने की कोशिश की, लेकिन तब तक रकम दूसरे खातों में भेजी जा चुकी थी।
पुलिस को आशंका है कि इन घटनाओं के पीछे बाहरी राज्यों के संगठित साइबर गिरोह सक्रिय हैं। वर्ष 2025 में भी गोलबाजार, तेलीबांधा, उरला और टिकरापारा क्षेत्रों में इसी तरह की कई वारदातें सामने आई थीं, जिनकी जांच में बिहार के साहिबगंज से जुड़े गिरोह का नाम सामने आया था। मौजूदा घटनाओं का तरीका भी उसी पैटर्न से मिलता-जुलता बताया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। वहीं विशेषज्ञों ने लोगों को मोबाइल गुम होने की स्थिति में तुरंत सिम ब्लॉक कराने, बैंक खाते को अस्थायी रूप से होल्ड करवाने और सभी यूपीआई व बैंकिंग ऐप्स के पासवर्ड बदलने की सलाह दी है।

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