सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 38 स्पेशल एजुकेटरों की नियुक्ति लंबित, दिव्यांग बच्चों की शिक्षा प्रभावित

बिलासपुर, 01 जून 2026। छत्तीसगढ़ में विशेष आवश्यकता वाले (दिव्यांग) बच्चों की शिक्षा को लेकर एक गंभीर स्थिति सामने आई है। राज्य में उच्च प्राथमिक स्तर के लिए चयनित 38 स्पेशल एजुकेटर (विशेष शिक्षक) कई महीनों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। स्कूल आवंटन हो जाने और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद उनकी जॉइनिंग अब तक नहीं हो सकी है।
जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग ने चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की थी और उन्हें स्कूलों का आवंटन भी कर दिया गया था। इसके बाद टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिसके चलते उनकी जॉइनिंग रोक दी गई।
अभ्यर्थियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि स्पेशल एजुकेटर पद के लिए सामान्य टीईटी अनिवार्य योग्यता नहीं है। 5 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था। इसके बावजूद राज्य शिक्षा विभाग ने अब तक अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल 38 अभ्यर्थियों के रोजगार का नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत हजारों दिव्यांग विद्यार्थियों के शिक्षा अधिकार से भी जुड़ा हुआ है। प्रदेश में पहले से ही स्पेशल एजुकेटरों की कमी है, जिसके कारण कई बच्चों को समुचित शैक्षणिक सहायता नहीं मिल पा रही है।
नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने डीपीआई और शिक्षा संचालनालय को ज्ञापन सौंपकर जल्द जॉइनिंग आदेश जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि नियुक्ति में हो रही देरी से न केवल उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि दिव्यांग बच्चों की शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

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