एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, ‘इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका ने एक साफ योजना दी। जिसके तहत पहले हिजबुल्ला को इस्राइल पर सभी हमले रोकने होंगे। इसके बदले में इस्राइल भी बेरूत में किसी तरह की और सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा। इससे धीरे-धीरे तनाव कम करने और लड़ाई खत्म करने का रास्ता बनेगा।’
अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति जोसेफ आउन इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाना चाहते थे और सभी पक्षों के बीच सहमति बनवाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन यह कोशिश लेबनान के संसद अध्यक्ष नबीह बेरी के जवाब के बाद रुक गई। नबीह हिजबुल्ला के करीबी सहयोगी माने जाते हैं। अधिकारी के अनुसार, बेरी ने कहा कि वे हिजबुल्ला की तरफ से सीजफायर का भरोसा दिला सकते हैं, लेकिन उन्होंने शर्त रखी कि पहले इस्राइल को सैन्य कार्रवाई रोकनी होगी।
अमेरिका ने इस संघर्ष के लिए ईरान को भी जिम्मेदार ठहराया है। अधिकारी ने कहा, ‘ईरान हिजबुल्ला को निर्देश दे रहा है। उसे लेबनान के लोगों की भलाई में कोई रुचि नहीं है। ईरान चाहता है कि यह संघर्ष लंबा चले ताकि वह बाद में स्थिति संभालने का श्रेय ले सके।’
ईरान का भी अमेरिका पर पलटवार का दावा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बताया है कि अमेरिकी हमले के जवाब में उन्होंने भी अमेरिका के उन एयरबेस को निशाना बनाया है, जहां से ईरान पर हवाई हमले किए गए। हालांकि आईआरजीसी ने इस मामले में ज्यादा जानकारी नहीं दी।
कुवैत का दावा- उन पर हुए हवाई हमले
कुवैत ने दावा किया है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने देश की ओर बढ़ रहे ड्रोन और मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया है। इन हमलों के दौरान कुवैत के कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं, जिन्हें कुवैती सेना ने इंटरसेप्शन ऑपरेशन का हिस्सा बताया। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।

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