चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन को मंजूरी, 755 करोड़ की परियोजना से कोयला परिवहन को मिलेगी नई रफ्तार

बिलासपुर/रायपुर, 17 जून: देश के प्रमुख कोयला गलियारे में रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के अंतर्गत आने वाली चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना को 755 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मंजूरी प्रदान की गई है। 42 किलोमीटर लंबी यह परियोजना भारतीय रेलवे के मिशन 3000 मीट्रिक टन और हाई-डेंसिटी नेटवर्क कॉरिडोर पहल का हिस्सा है।
परियोजना के तहत पहले से स्वीकृत मड़वारानी-सरागबंदिया खंड को छोड़कर चांपा और कोरबा के बीच तीसरी रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। इससे क्षेत्र में माल ढुलाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और कोयला परिवहन अधिक सुगम एवं तेज बनेगा।
कोरबा, जिसे देश की पावर कैपिटल के रूप में जाना जाता है, में बड़ी संख्या में थर्मल पावर प्लांट संचालित हैं। यह क्षेत्र देश के सबसे महत्वपूर्ण कोयला परिवहन केंद्रों में शामिल है। चांपा-कोरबा रेल खंड साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) के कोयला क्षेत्रों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क तथा मुंबई-हावड़ा हाई-डेंसिटी कॉरिडोर से जोड़ता है।
वर्तमान में इस व्यस्त रेल मार्ग पर प्रतिदिन लगभग 10 जोड़ी यात्री ट्रेनें और 55 जोड़ी मालगाड़ियां संचालित होती हैं। एसईसीएल और एमसीएल की संयुक्त उत्पादन क्षमता फिलहाल करीब 247 मिलियन टन प्रतिवर्ष है, जो आने वाले वर्षों में बढ़कर लगभग 450 मिलियन टन प्रतिवर्ष होने का अनुमान है। इससे करीब 200 मिलियन टन अतिरिक्त कोयला परिवहन की आवश्यकता पैदा होगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार तीसरी रेल लाइन बनने से मालगाड़ियों की आवाजाही सुगम होगी, कोयला आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और बिजली उत्पादन क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही रेलवे की मालभाड़ा आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है।न 2026

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