सरकार का कहना है कि यह फैसला परीक्षा से जुड़ी अफवाहों, फर्जी प्रश्नपत्रों और पेपर लीक जैसे मामलों पर रोक लगाने के लिए लिया गया है। हाल के दिनों में कई टेलीग्राम चैनलों और ग्रुप्स के जरिए परीक्षार्थियों को कथित प्रश्नपत्र बेचने और भ्रामक जानकारी फैलाने की शिकायतें मिली थीं।
NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि 22 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य को देखते हुए परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक किसी भी प्रकार के पेपर लीक की पुष्टि नहीं हुई है और सोशल मीडिया पर वायरल अधिकांश दावे फर्जी पाए गए हैं।
परीक्षा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में प्रश्नपत्रों को सैन्य हेलिकॉप्टरों की मदद से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की तैयारी भी की जा रही है। तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में इसका ट्रायल शुरू हो चुका है।
गृह मंत्रालय की साइबर विंग और विभिन्न राज्यों की पुलिस भी सक्रिय हो गई है। कई फर्जी चैनलों, ग्रुप्स और बॉट नेटवर्क्स पर कार्रवाई की जा रही है, जो छात्रों से पैसे लेकर कथित प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा कर रहे थे।
हालांकि, डिजिटल अधिकारों से जुड़े कुछ संगठनों ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि धोखाधड़ी रोकने के लिए पूरे प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने के बजाय लक्षित कार्रवाई ज्यादा प्रभावी हो सकती है। इसके बावजूद सरकार का दावा है कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम आवश्यक है।

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