कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों के उकसावे के कारण 7 से 8 हजार लोगों की भीड़ बेकाबू हुई, जिससे लगभग 13 से 14 करोड़ रुपये की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा। हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला भी किया गया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि समाज में शांति और कानून व्यवस्था को पूरी तरह बिगाड़ने वाले ऐसे गंभीर मामलों में आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने बलौदाबाजार बवाल, पथराव और कलेक्टोरेट परिसर में आगजनी को बेहद गंभीर अपराध माना।
इस फैसले के बाद मामले में आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने फैसले को कानून व्यवस्था के लिए अहम बताया है।

Comments