रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में आयोजित इस शिविर का शुभारंभ सोमवार को किया गया। शिविर का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और विलुप्त होती लोक कलाओं को नई पहचान देना है।
इस बार शिविर में पारंपरिक कलाओं के साथ-साथ आधुनिक तकनीक आधारित AI आर्ट प्रशिक्षण को भी शामिल किया गया है। प्रतिभागियों को टेरेकोटा आर्ट, गोदना कला, मंडना, भित्ति चित्रकला, जूट शिल्प, लोक संगीत, लोकनृत्य और हस्तकला जैसी विधाओं की बारीकियां सिखाई जाएंगी।
संस्कृति विभाग के अधिकारियों के अनुसार शिविर में प्रदेश और देश के अनुभवी कलाकार एवं कला विशेषज्ञ प्रशिक्षण देंगे। प्रतिभागियों के लिए दो पालियों में कक्षाएं आयोजित की जाएंगी ताकि अधिक से अधिक बच्चे इसका लाभ उठा सकें।
शिविर के समापन अवसर पर प्रतिभागियों की बनाई कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। साथ ही प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले बच्चों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।
‘आकार-2026’ को लेकर बच्चों और अभिभावकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। यह शिविर पारंपरिक लोककला को आधुनिक सोच और तकनीक के साथ जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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