बिलासपुर, 10 मई 2026/आरसेटी बिलासपुर में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक नई और प्रेरणादायी पहल सामने आई है। अब ग्रामीण महिलाएं केवल सिलाई, बुनाई या पारंपरिक रोजगार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उन क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रही हैं जिन्हें वर्षों से पुरुष प्रधान माना जाता रहा है। इसी बदलाव की मिसाल पेश कर रही हैं बिहान से जुड़ी महिलाएं, जो अब इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रही हैं।
कोनी स्थित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में इस वर्ष पहली बार महिलाओं के लिए इलेक्ट्रिशियन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। इस प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से आई 20 से अधिक महिलाओं ने भागीदारी की। प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को तकनीकी कौशल प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना था। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली रतनपुर की बिहान दीदी आमना बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि बिजली का कार्य केवल पुरुष ही कर सकते हैं, लेकिन प्रशिक्षण के दौरान उनकी यह सोच पूरी तरह बदल गई। कुशल प्रशिक्षकों ने उन्हें वायरिंग, स्विच बोर्ड सुधार, घरेलू विद्युत उपकरणों की मरम्मत, सुरक्षा उपाय और तकनीकी जानकारी सरल तरीके से सिखाई। आमना कहती हैं कि अब वे आत्मविश्वास के साथ घर के बिजली संबंधी कार्य स्वयं कर लेती हैं और भविष्य में इसी कौशल के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने की योजना बना रही हैं। वे बताती हैं कि पहले छोटी-छोटी बिजली खराबियों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब वे न केवल अपने घर की समस्याएं हल कर पा रही हैं, बल्कि आसपास के लोगों की मदद भी करने लगी हैं। आमना का मानना है कि यह प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रहा है।
इसी तरह मस्तूरी के डोमगांव की तिगमती डहरिया ने बताया कि उन्हें पहले से ही बिजली के कार्यों में रुचि थी और वे एक निजी कंपनी में इलेक्ट्रिशियन के रूप में कार्य कर रही थीं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उनके तकनीकी ज्ञान और आत्मविश्वास में और अधिक वृद्धि हुई है। तिगमती डहरिया बताती हैं कि इस प्रशिक्षण ने उन्हें आधुनिक तकनीकों और सुरक्षा मानकों की बेहतर समझ दी है। जब उनसे जोखिम भरे कार्य के बारे में पूछा गया तो उन्होंने आत्मविश्वास से कहा कि “यदि सावधानी, सही तकनीक और सुरक्षा नियमों का पालन किया जाए तो यह कार्य महिलाओं के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है।” विमला का कहना है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, आवश्यकता केवल अवसर और सही प्रशिक्षण की होती है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं ने सरकार द्वारा संचालित महिला सशक्तिकरण योजनाओं की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने बताया कि प्रशिक्षण अवधि के दौरान उनके रहने और भोजन की बेहतर व्यवस्था की गई थी। साथ ही अनुभवी एवं कुशल प्रशिक्षकों द्वारा व्यवहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें कार्य के हर पहलू की जानकारी दी गई। महिलाओं ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि आत्मविश्वास, कार्य अनुशासन और स्वरोजगार के अवसरों के बारे में भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। इससे उनमें आत्मनिर्भर बनने की नई ऊर्जा और विश्वास पैदा हुआ है।
उल्लेखनीय है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वरा एसबीआई के सहयोग से ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। हर वर्ष सिलाई, ब्यूटी पार्लर, कम्प्यूटर, अगरबत्ती निर्माण जैसे पारंपरिक कोर्स चलाए जाते रहे हैं, लेकिन इस वर्ष पहली बार महिलाओं के लिए इलेक्ट्रिशियन प्रशिक्षण शुरू किया गया, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में नई सोच और सकारात्मक बदलाव की शुरुआत की है। यह पहल केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर समाज में उनकी भागीदारी और सम्मान बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ग्रामीण महिलाओं को मिली आत्मनिर्भरता की नई रोशनी

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