मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर के सामने अब टीम की कमजोरियों को दूर कर मजबूत संयोजन तैयार करने की चुनौती है। भारत को इंग्लैंड और इसके बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ कुल आठ टी20 मुकाबले खेलने हैं, जिनके आधार पर एशियन गेम्स के लिए अंतिम रणनीति तय होगी।
आयरलैंड दौरे ने भारतीय टीम की कई कमियां उजागर कर दीं। पावरप्ले में सलामी बल्लेबाज तेज शुरुआत दिलाने में नाकाम रहे, जिससे मध्यक्रम पर दबाव बढ़ गया। संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। हालांकि अभिषेक ने पहले मैच में 49 रन बनाए, लेकिन दूसरे मुकाबले में खाता भी नहीं खोल पाए।
मध्यक्रम और फिनिशिंग भी चिंता का विषय रही। तिलक वर्मा ने कुछ संघर्ष जरूर किया, लेकिन रन गति नहीं बढ़ा सके। कप्तान श्रेयस अय्यर, अक्षर पटेल और शिवम दुबे बल्ले से प्रभाव नहीं छोड़ पाए। हार्दिक पांड्या की गैरमौजूदगी भी टीम को खलती दिखाई दी।
गेंदबाजी में डेथ ओवर सबसे कमजोर कड़ी साबित हुए। आयरलैंड ने दोनों मैचों में अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाकर मुकाबले का रुख बदल दिया। वहीं टीम चयन को लेकर भी सवाल उठे। तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा महंगे साबित हुए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर का प्रभावी उपयोग नहीं हो सका।
सबसे बड़ी निराशा कप्तान श्रेयस अय्यर का प्रदर्शन रहा। दोनों मैचों में वह सिर्फ 13 रन बना सके। ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज भारतीय टीम के लिए आत्मविश्वास लौटाने, सही संयोजन तलाशने और एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक बचाने की दिशा में निर्णायक साबित होगी।

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