एलपीजी सिलेंडर महंगा हुआ तो घटी एडवांस बुकिंग, उपभोक्ता हुए सतर्क

बिलासपुर: वैश्विक परिस्थितियों और संभावित आपूर्ति संकट की आशंकाओं के बीच कुछ समय पहले बड़ी संख्या में घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं ने जरूरत से अधिक गैस सिलेंडर बुक करा लिए थे। हालांकि अब गैस आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद उपभोक्ता अतिरिक्त बुकिंग निरस्त करा रहे हैं। गैस कंपनियों के अनुसार पिछले महीने बिलासपुर क्षेत्र में करीब 11 हजार और पूरे छत्तीसगढ़ में 1 लाख 10 हजार से अधिक एलपीजी बुकिंग रद्द की गई हैं।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय हालात और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर फैली अनिश्चितता के कारण लोगों में गैस की कमी की आशंका पैदा हो गई थी। इसके चलते कई उपभोक्ताओं ने जरूरत न होने के बावजूद अग्रिम या अतिरिक्त सिलेंडर बुक करा लिए थे। लेकिन लगातार सुचारु आपूर्ति और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने से लोगों का भरोसा लौटा है। अब बड़ी संख्या में उपभोक्ता अपनी अतिरिक्त बुकिंग वापस ले रहे हैं, जिससे वितरण व्यवस्था पर बना दबाव भी कम हुआ है।
गैस एजेंसियों का कहना है कि वर्तमान में एलपीजी की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य है और उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। अतिरिक्त बुकिंग रद्द होने से नियमित उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर मिलने में भी सुविधा हो रही है। एजेंसियों के अनुसार कृत्रिम मांग कम होने से वितरण प्रणाली पहले की तुलना में अधिक सुचारु रूप से संचालित हो रही है।
 
महंगाई का भी दिखा असर
 
एलपीजी बुकिंग में कमी आने का एक कारण घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में हुई बढ़ोतरी भी मानी जा रही है। पिछले माह 14.2 किलोग्राम का घरेलू सिलेंडर 1001 रुपये में उपलब्ध था, जिसकी कीमत बढ़कर अब 1030 रुपये हो गई है। बढ़ती कीमतों के कारण कई परिवार अब जरूरत पड़ने पर ही गैस बुक कराने को प्राथमिकता दे रहे हैं। पहले जहां उपभोक्ता एडवांस बुकिंग करा लेते थे, वहीं अब अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए ऐसा कम कर रहे हैं। कीमतों में वृद्धि का असर घरेलू बजट पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
 
अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह
 
गैस एजेंसियों का कहना है कि आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और उपभोक्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना ही बेहतर विकल्प है। इससे कृत्रिम मांग पैदा नहीं होगी और सभी उपभोक्ताओं तक आवश्यक संसाधन समय पर पहुंच सकेंगे।

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