कांग्रेस के आदिवासी प्रकोष्ठ के एक कार्यक्रम में संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि देश गंभीर आर्थिक चुनौतियों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने वाले तंत्र को कमजोर कर दिया है, जिसके कारण भविष्य में बड़ी आर्थिक उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के भीतर ही "संस्थागत विद्रोह" की स्थिति बन रही है। उनके अनुसार विभिन्न संवैधानिक और प्रशासनिक संस्थाओं के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें कई महत्वपूर्ण संस्थानों से जुड़े लोगों के संदेश मिल रहे हैं, जो मौजूदा व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। भाजपा की ओर से अभी इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उनके दावे को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है।

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