रायपुर, 11 मई 2026: खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच प्रदेश के किसान एक बार फिर खाद संकट और नई वितरण व्यवस्था की उलझनों से परेशान हैं। खाद लेने के लिए पंजीयन और टोकन प्रणाली अनिवार्य किए जाने के बाद किसानों को सोसायटियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं खाद की मात्रा में कटौती के आदेश से किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
प्रदेशभर की सहकारी समितियों में किसानों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। किसानों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिलने से खेती की तैयारी प्रभावित हो रही है। नई व्यवस्था के तहत डीएपी और यूरिया की सीमित मात्रा देने का प्रावधान किया गया है, जबकि पिछले वर्ष किसानों को अधिक मात्रा में खाद उपलब्ध कराया गया था।
जानकारी के अनुसार इस बार प्रति एकड़ खाद वितरण में कटौती की गई है। किसानों को डीएपी की केवल एक बोरी और यूरिया भी सीमित मात्रा में देने की बात कही जा रही है। इसके अलावा टोकन प्रक्रिया के कारण किसानों को कई बार सोसायटियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि ऑनलाइन पंजीयन और टोकन व्यवस्था से परेशानी बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी दिक्कतों और इंटरनेट समस्या के कारण कई किसान समय पर पंजीयन नहीं कर पा रहे हैं। इससे खेती की तैयारी प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है।
वहीं विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं ने खाद वितरण नीति को किसान विरोधी बताते हुए आदेश वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं कराई गई तो खरीफ सीजन में उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन से पहले खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यदि समय पर समाधान नहीं निकला तो किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
खरीफ से पहले खाद संकट: पंजीयन और टोकन सिस्टम में उलझे किसान

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