नई दिल्ली। मोबाइल नेटवर्क की दुनिया में बड़ा बदलाव आने वाला है। आने वाले वर्षों में ‘नो नेटवर्क’ या कमजोर सिग्नल जैसी समस्याएं इतिहास बन सकती हैं। सैटेलाइट कॉलिंग तकनीक के जरिए अब सीधे आसमान से मोबाइल तक नेटवर्क पहुंचेगा, जिससे दूर-दराज और दुर्गम इलाकों में भी बेहतरीन कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2030 तक दुनिया के करीब 46% स्मार्टफोन्स में सैटेलाइट कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। यानी लगभग हर दूसरा स्मार्टफोन इस नई तकनीक से लैस होगा।
शुरुआत प्रीमियम स्मार्टफोन्स से हुई है, लेकिन धीरे-धीरे यह फीचर मिड-रेंज और बजट फोन्स में भी पहुंचेगा। फिलहाल कई बड़ी टेक कंपनियां अपने-अपने सैटेलाइट नेटवर्क पर काम कर रही हैं और इसे ग्लोबल स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रही हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अभी यह तकनीक महंगी है और सीमित उपयोग (जैसे SOS मैसेजिंग) के लिए ही ज्यादा इस्तेमाल हो रही है। जब तक इसमें कॉलिंग और इंटरनेट जैसी सुविधाएं पूरी तरह शामिल नहीं होतीं, तब तक आम यूजर्स के बीच इसका व्यापक उपयोग थोड़ा समय ले सकता है।
लेकिन जैसे ही 3GPP जैसे वैश्विक मानक पूरी तरह लागू होंगे और टेक्नोलॉजी सस्ती होगी, यह फीचर आम लोगों के लिए भी आसानी से उपलब्ध हो जाएगा।
मोबाइल नेटवर्क में क्रांति: धरती से नहीं, अब अंतरिक्ष से मिलेगी कनेक्टिविटी

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