अब ‘बिना बताए’ नहीं मिलेगी छुट्टी: सरकारी कर्मचारियों पर कसा शिकंजा, कलेक्टर की मंजूरी जरूरी, मुख्यालय छोड़ने पर भी रोक

रायपुर । छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों पर अब कड़ा पहरा लग गया है। एक जिले के कलेक्टर ने नया आदेश जारी कर साफ कर दिया है कि अब कोई भी कर्मचारी कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना छुट्टी नहीं ले सकेगा*। इतना ही नहीं, *मुख्यालय छोड़कर बाहर जाने पर भी रोक लगा दी गई है।

क्या है नया नियम:
हर छुट्टी पर मुहर: कैजुअल लीव, अर्जित अवकाश, मेडिकल लीव - किसी भी तरह का अवकाश अब सीधे HOD या विभाग प्रमुख मंजूर नहीं कर पाएंगे। फाइल कलेक्टर के पास जाएगी।
मुख्यालय बंधन: बिना बताए स्टेशन लीव पर जाना यानी मुख्यालय से बाहर जाना भी बैन। इमरजेंसी में भी कलेक्टर को सूचित करना जरूरी।
कारण बताओ: छुट्टी का ठोस कारण और जरूरत बतानी होगी। घूमने-फिरने के लिए छुट्टी अब आसान नहीं।

क्यों आया आदेश: प्रशासन का कहना है कि कई विभागों में कर्मचारी बिना सूचना गायब हो जाते हैं। इससे जरूरी सरकारी काम अटकते हैं। फील्ड विजिट, जनगणना, गर्मी में राहत कार्य जैसे मिशन मोड के काम प्रभावित हो रहे थे। “कार्यालयों में स्टाफ की मौजूदगी सुनिश्चित करना और काम में अनुशासन लाना” मकसद है।

किस पर लागू: यह आदेश जिले के सभी सरकारी विभागों के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों पर लागू होगा। अफसरों के लिए पहले से ही नियम सख्त हैं।

उल्लंघन पर क्या: बिना अनुमति छुट्टी लेने या मुख्यालय छोड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। वेतन कट सकता है और सर्विस बुक में एंट्री भी होगी।

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