डॉक्टरों के अनुसार, जब गर्मी और नमी दोनों बढ़ जाती हैं, तो शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम प्रभावित होने लगता है। पसीना तो निकलता है, लेकिन उसके वाष्पीकरण में बाधा आने से शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं हो पाता। यही स्थिति आगे चलकर हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक पसीना आने से शरीर से पानी के साथ-साथ सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट्स भी बाहर निकल जाते हैं। ये मिनरल्स मांसपेशियों, नसों और शरीर के जल संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक यदि व्यक्ति अत्यधिक पसीना आने के बाद केवल पानी पीता है, तो इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी नहीं हो पाती। इससे थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, चक्कर आना और लगातार प्यास लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञ गर्मी के मौसम में ओआरएस, नमक और नींबू युक्त पानी, नारियल पानी, छाछ तथा संतुलित आहार को नियमित रूप से लेने की सलाह देते हैं। इससे शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स दोनों का संतुलन बना रहता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने विशेष रूप से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। इन रोगों की दवाएं शरीर के तरल और मिनरल संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार, शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की अत्यधिक कमी होने पर ब्लड वॉल्यूम कम हो जाता है, जिससे रक्त संचार प्रभावित होता है। गंभीर स्थिति में यह हाइपोवोलेमिया, बेहोशी, किडनी की समस्या और हृदय संबंधी जटिलताओं का कारण भी बन सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से दोपहर की तेज धूप से बचने, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने की अपील की है।

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