निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- सरकारी दरें थोपेंगे तो बंद हो जाएंगे संस्थान

नई दिल्ली, 25 जून 2026: नई दिल्ली। निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस संरचना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि स्व-वित्तपोषित मेडिकल संस्थानों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों के समान फीस लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा किया गया तो निजी मेडिकल कॉलेज बंद हो सकते हैं, जबकि देश को बड़ी संख्या में डॉक्टरों की आवश्यकता है।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राजस्थान के निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस संरचना को चुनौती देने वाली याचिका पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। याचिका में दावा किया गया था कि निजी मेडिकल कॉलेजों में वार्षिक ट्यूशन फीस 18.90 लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए निर्धारित 8 लाख रुपये की आय सीमा के अनुरूप नहीं है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि जिन छात्रों के पास फीस चुकाने की क्षमता है, वे निजी कॉलेजों में पढ़ाई कर सकते हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र छात्रवृत्ति, वित्तीय सहायता या सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश जैसे विकल्प चुन सकते हैं।
पीठ ने स्पष्ट किया कि स्व-वित्तपोषित संस्थान अपनी आर्थिक व्यवस्था के आधार पर संचालित होते हैं। यदि उन पर सरकारी फीस ढांचा लागू किया गया तो चिकित्सा शिक्षा में उनका योगदान प्रभावित होगा और कई संस्थान बंद होने की स्थिति में आ सकते हैं।
याचिकाकर्ता ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के 3 फरवरी 2022 के कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा था कि निजी मेडिकल कॉलेजों और डीम्ड विश्वविद्यालयों की 50 प्रतिशत सीटों की फीस सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बराबर रखने की सिफारिश की गई है। हालांकि, अदालत ने कहा कि राजस्थान सरकार ने इस दिशा-निर्देश को लागू नहीं किया है और इससे संबंधित एक अन्य मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट की एकल और खंडपीठ दोनों ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि संविधान के 103वें संशोधन के तहत EWS आरक्षण केवल प्रवेश प्रक्रिया तक सीमित है और यह निजी मेडिकल कॉलेजों में रियायती फीस का स्वतः अधिकार नहीं देता।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी, लेकिन यह भी कहा कि यदि भविष्य में कोई महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न उत्पन्न होता है तो उस पर विचार के लिए रास्ता खुला रहेगा।

Comments