गैस रिसाव की सूचना मिलते ही अरक्कोनम स्थित NDRF की चौथी बटालियन को अलर्ट किया गया। इसके बाद चेन्नई से 30 सदस्यीय विशेष टीम अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची। टीम पीपीई किट, गैस डिटेक्शन डिवाइस और सीबीआरएन (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल एवं परमाणु) आपदा प्रबंधन उपकरणों से लैस है। फिलहाल गैस रिसाव को नियंत्रित करने और प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित बनाने का कार्य जारी है।
जिला कलेक्टर एस. कविता ने बताया कि प्रभावित श्रमिकों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। 46 मरीजों को वेल्स हॉस्पिटल और 21 मरीजों को वेंकटेश्वर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। इनमें से नौ गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए चेन्नई के सरकारी स्टेनली मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया है।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार अधिकांश प्रभावित कर्मचारी 24 से 25 वर्ष आयु वर्ग की युवा महिलाएं हैं। कई मरीजों का रक्तचाप सामान्य से काफी कम पाया गया है। कुछ मरीजों को वेंटिलेटर और इंट्यूबेशन सपोर्ट पर रखा गया है। चिकित्सकों का कहना है कि उम्र कम होने के कारण अधिकांश मरीजों के जल्द स्वस्थ होने की संभावना है।
प्रारंभिक जांच में फैक्ट्री के किसी वाल्व में खराबी के कारण अमोनिया गैस रिसाव की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने सुरक्षा मानकों के पालन और संभावित लापरवाही की जांच के आदेश दे दिए हैं।
घटना को गंभीरता से लेते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। समिति में औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य निदेशक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक शामिल हैं। समिति को 24 घंटे के भीतर अंतरिम और तीन दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री ने संबंधित मंत्रियों और अधिकारियों को तत्काल घटनास्थल पहुंचकर राहत एवं उपचार कार्यों की निगरानी करने तथा प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

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