अब उपभोक्ताओं के घर मीटर रीडर के पहुंचने की आवश्यकता नहीं रह गई है। बिजली उपभोक्ताओं को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर सीधे बिजली बिल भेजे जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ पावर वितरण कंपनी ने व्हाट्सएप के माध्यम से भी बिल उपलब्ध कराने की सुविधा शुरू कर दी है, जिससे उपभोक्ता बिल डाउनलोड कर सुरक्षित रख सकते हैं।
राज्य के विकासखंड स्तर तक के लगभग सभी सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य पूरा हो चुका है। शहरों और कस्बों में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को अब बिना मीटर रीडर के घर आए सीधे मोबाइल पर बिजली बिल प्राप्त हो रहा है।
मीटर रीडरों के सामने रोजगार की चुनौती
स्मार्ट मीटर प्रणाली लागू होने से मीटर रीडिंग का काम लगभग समाप्त हो गया है। वर्षों से रीडिंग का कार्य करने वाले मीटर रीडरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि बिजली कंपनी प्रबंधन ने उन्हें उपभोक्ताओं के घर जाकर ई-केवाईसी कराने जैसी नई जिम्मेदारियां देने की योजना बनाई है
कई राज्यों में स्मार्ट मीटर का विरोध
स्मार्ट मीटर और प्रीपेड व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। तकनीकी समस्याओं और उपभोक्ताओं की शिकायतों के चलते उत्तर प्रदेश में प्रीपेड मीटर व्यवस्था लागू करने का निर्णय भी टालना पड़ा था।
केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि प्रीपेड बिजली प्रणाली स्वैच्छिक होगी और उपभोक्ताओं पर इसे अपनाने का दबाव नहीं बनाया जाएगा। वहीं जिन दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क और कनेक्टिविटी की समस्या है, वहां स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य नहीं किया गया है।
सरकारी विभागों में प्रीपेड सिस्टम अभी अटका
हालांकि सरकारी विभागों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन वहां अब तक प्रीपेड सिस्टम लागू नहीं हो सका है। बिजली कंपनी ने एक अप्रैल से इसे लागू करने की योजना बनाई थी, लेकिन विभागों द्वारा अग्रिम भुगतान व्यवस्था पर सहमति नहीं बनने के कारण मामला लंबित है। इस संबंध में विभागीय स्तर पर लगातार चर्चा जारी है।

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