जांच के दौरान पता चला कि आरोपी पहले ब्रांडेड शराब की खाली बोतलें एकत्र करते थे। इसके बाद उनमें स्प्रिट और चायपत्ती का मिश्रण भरकर नकली लेबल, होलोग्राम और पैकेजिंग के जरिए उन्हें असली शराब जैसा स्वरूप दिया जाता था। फिर इन बोतलों को बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जाता था।
पुलिस पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि नकली शराब बनाने के लिए उपयोग होने वाला कच्चा माल और पैकिंग सामग्री झारखंड से मंगाई जाती थी, जबकि तैयार माल की सप्लाई विभिन्न राज्यों में की जाती थी। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार स्प्रिट और अन्य मिलावटी पदार्थों से तैयार नकली शराब का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इससे लीवर, किडनी और आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचने के साथ जान का खतरा भी हो सकता है। प्रशासन ने नागरिकों से शराब खरीदते समय सील, बारकोड और होलोग्राम की जांच करने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को देने की अपील की है।

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