जानकारी के अनुसार, अप्रैल में दुष्कर्म की घटना के बाद पीड़िता को सखी सेंटर में रखा गया था। बाद में पेट दर्द और स्वास्थ्य बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
बताया जा रहा है कि सखी सेंटर में निर्धारित समय से अधिक अवधि तक पीड़िता को रखने और उसकी समुचित निगरानी नहीं किए जाने के आरोप भी लगे हैं। वहीं, पोस्टमार्टम के दौरान मिले संदिग्ध सामान ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब फोरेंसिक जांच और विभागीय जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने महिला एवं बाल संरक्षण संस्थाओं की कार्यप्रणाली और संवेदनशील मामलों में निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

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