जानकारी के अनुसार, स्कूटी सवार दो युवक शहर के विभिन्न इलाकों में दुकानों पर पहुंचे और खरीदारी के बाद ऑनलाइन भुगतान करने की बात कही। उन्होंने दुकानदारों को अपने मोबाइल में पेमेंट सफल होने का स्क्रीन दिखाया, जिससे दुकानदारों को विश्वास हो गया कि राशि उनके खाते में पहुंच गई है।
हालांकि कुछ दुकानदारों ने जब अपने बैंक खाते और मोबाइल मैसेज की जांच की तो पता चला कि कोई रकम प्राप्त नहीं हुई है। इसके बाद उन्हें ठगी का संदेह हुआ। मामले की जानकारी आसपास के व्यापारियों को दी गई, जिसके बाद लोगों ने सतर्कता बढ़ाई।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्लोन या फर्जी पेमेंट ऐप्स के जरिए ठग असली भुगतान जैसा इंटरफेस तैयार कर लेते हैं। ऐसे में केवल मोबाइल स्क्रीन देखकर भरोसा करना खतरनाक साबित हो सकता है। भुगतान स्वीकार करने से पहले बैंक खाते में राशि आने की पुष्टि करना जरूरी है।
पुलिस ने भी लोगों से अपील की है कि डिजिटल लेनदेन के दौरान सावधानी बरतें और केवल पेमेंट स्क्रीन के आधार पर सामान या नकदी न दें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस और साइबर हेल्पलाइन को दें।

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