राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि नया प्रदेश प्रभारी बिहार से हो सकता है। हालांकि अभी तक पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
नितिन नबीन का छत्तीसगढ़ में लंबा संगठनात्मक कार्यकाल रहा। 2018 विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद पार्टी ने संगठन में बदलाव करते हुए पहले डी. पुरंदेश्वरी को प्रदेश प्रभारी और नितिन नबीन को सहप्रभारी बनाया था। बाद में ओम माथुर को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी मिली, लेकिन उनके हटने के बाद नितिन नबीन को पूर्णकालिक प्रभारी बनाया गया।
उनके कार्यकाल में भाजपा ने 2023 का छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा, जिसमें पार्टी को उल्लेखनीय सफलता मिली। सहप्रभारी से प्रदेश प्रभारी तक का उनका सफर करीब सात वर्षों तक छत्तीसगढ़ की राजनीति और संगठन में प्रभावशाली माना गया।
अब राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पुनर्गठन के साथ विभिन्न राज्यों के प्रभारियों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। छत्तीसगढ़ भाजपा के नेता फिलहाल दिल्ली नेतृत्व के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। राज्य में भाजपा सरकार के लगभग 29 महीने पूरे हो चुके हैं और अगले चुनावों के लिए करीब दो साल का समय बचा है। ऐसे में संगठन जल्द नए प्रभारी की नियुक्ति कर सकता है।
प्रदेश प्रभारी के तौर पर नितिन नबीन ने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय संपर्क बनाए रखने की अलग पहचान बनाई। चुनावी दौर में मनसुख मांडविया भी चुनाव प्रभारी के रूप में सक्रिय रहे, लेकिन चुनाव के बाद उनकी भूमिका सीमित हो गई। अब नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन की कमान किसी नए चेहरे को सौंपे जाने की तैयारी मानी जा रही

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