शक्तिगढ़ की बॉक्सिंग-पॉलिटिक्स नहीं जम पाई: ‘ग्लोरी’ रिव्यू, पहला एपिसोड ठीक, फिर उलझी कहानी”

ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई वेब सीरीज ‘ग्लोरी’ की कहानी कागज पर दमदार लगती है। बॉक्सिंग की राजनीति, ओलंपिक तक पहुंचने की होड़ और एक पिता की अति महत्वाकांक्षा जैसी कई चीजें सीरीज में मौजूद हैं। हालांकि, स्क्रीन पर आते ही कहानी का दम धीरे-धीरे निकलता हुआ नजर आता है। कई मजबूत विषय होने के बावजूद सीरीज पकड़ नहीं बना पाती और कई बार सिर्फ दिखावे तक सिमट जाती है।
 कहानी : कहानी शक्तिगढ़ नाम के एक काल्पनिक शहर में सेट है, जहां बॉक्सिंग, परिवार और अपराध की दुनिया साथ-साथ चलती है। यह एक ऐसे परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पहले ही अंदर से बिखरा हुआ है। रघुबीर सिंह (सुविंदर विक्की) एक सख्त बॉक्सिंग कोच हैं, जिनकी सोच और व्यवहार की वजह से उनके बेटे उनसे दूर हो चुके हैं। देव (दिव्येंदु) और रवि (पुलकित सम्राट) अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं।
बहन गुड़िया (जन्नत जुबैर) पर हमला दोनों भाइयों को वापस खींच लाता है। यहां से कहानी एक जांच में बदलती है और धीरे-धीरे इसमें राजनीति, अपराध और बॉक्सिंग की दुनिया जुड़ती जाती है। शुरुआत में यह सब दिलचस्प लगता है और पहला एपिसोड ध्यान खींचता है, लेकिन इसके बाद कहानी अपने ही बनाए जाल में फंसने लगती है। सबसे बड़ी कमी यह है कि जिस भावनात्मक आधार पर कहानी टिकनी चाहिए थी, वही कमजोर है। 
 अभिनय: दिव्येंदु सीरीज की सबसे मजबूत कड़ी हैं। देव के किरदार में उनका अभिनय सधा हुआ है और वह अपने किरदार की बेचैनी को अच्छे से दिखाते हैं। पुलकित ने भी ठीक काम किया है, लेकिन उनका किरदार उतना गहरा नहीं बन पाता। जन्नत जुबैर का रोल अहम होने के बावजूद सीमित रह जाता है। सुविंदर विक्की का किरदार जितना असरदार हो सकता था, उतना है नहीं। सपोर्टिंग कास्ट में सिकंदर खेर का कूकी वाला किरदार कहानी से बाहर का लगता है। 
 आशुतोष राणा और यशपाल शर्मा जैसे कलाकार भी कई जगह जरूरत से ज्यादा नाटकीय हो जाते हैं। कश्मीरा परदेसी का किरदार बनावटी लगता है और सयानी गुप्ता का रोल सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाने का जरिया बनकर रह जाता है।
 निर्देशन : निर्देशन में स्टाइल तो है, लेकिन नियंत्रण की कमी साफ दिखती है। सीरीज को तेज और आकर्षक बनाने की कोशिश की गई है, लेकिन कई जगह यह सिर्फ दिखावा लगती है। एक्शन और बॉक्सिंग सीन ठीक हैं, लेकिन कई हिंसा वाले दृश्य ऐसे लगते हैं, जो सिर्फ चौंकाने के लिए डाले गए हैं। वह दिखावा भर हैं।

Comments