“खतरनाक खुलासा: बच्चों की स्कूल यूनिफॉर्म में ‘कैंसर वाले केमिकल’! फ्राई पैन, पैक्ड फूड भी PFAS से जहरीले”

ये  कहना गलत नहीं होगा कि मौजूदा समय में लोगों को हो रही बीमारियों में से 50-60% का कारण हमारी खुद की ही गड़बड़ आदते हैं। लाइफस्टाइल की गड़बड़ी ने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के जोखिम को और भी बढ़ा दिया है। आधुनिक जिंदगी में हम सुविधा और आराम के नाम पर जिन चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वही धीरे-धीरे हमारी सेहत के लिए खतरा बनती जा रही हैं।
विशेषज्ञों की एक टीम ने हमारे दैनिक जीवन से जुड़ी ऐसी चीजों को लेकर लोगों को सावधान किया है जो हमें कैंसर की तरफ धकेलती जा रही हैं। अध्ययन में पाया गया है कि बच्चे भी खतरे से सुरक्षित नहीं हैं। बच्चों के स्कूल यूनिफॉर्म में भी  ऐसे रसायन मौजूद पाए गए हैं जिनसे गंभीर खतरा हो सकता है। 
शोधकर्ताओं ने बताया कि भोजन में इस्तेमाल होने वाले आर्टिफिशियल तत्व, स्कूल यूनिफॉर्म व फ्राई पैन में कई ऐसे ‘फॉरएवर केमिकल्स’ पाए गए हैं जो युवाओं में जानलेवा कैंसर के बढ़ते मामलों की वजह बन रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात तो ये है कि इन सभी का हम रोजाना बेफ्रिक होकर इस्तेमाल करते रहते हैं और खतरे की भनक तक नहीं लगती।
युवाओं में बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले
अमेरिका में साल 2010 से 2019 के बीच कम उम्र में होने वाले कैंसर के मामलों में लगभग 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। दुनिया के अन्य देशों में भी ऐसी ही स्थिति देखी जा रही है। 
इन कैंसरों में ब्रेस्ट, आंत और थायरॉइड कैंसर, ओरल और लिवर कैंसर के साथ किडनी, पैक्रियाटिक और अंडाशय कैंसर तक शामिल हैं।
इन सभी को आमतौर पर मोटापे से होने वाले खतरे को रूप में जाना जाता रहा है।
लेकिन कैंसर रिसर्च और इंपीरियल कॉलेज लंदन के विशेषज्ञों का कहना है कि केवल वजन बढ़ना ही वयस्कों में इस तीव्र वृद्धि का कारण नहीं हो सकता।
उनका मानना है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (यूपीएफ) और पीएफएएस (कपड़े और घरेलू उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले फॉरएवर केमिकल्स) भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
पहले जान लीजिए फॉरएवर केमिकल्स क्या हैं और इससे कितना खतरा है?
फॉरएवर केमिकल्स या पर-एंड पॉलीफ्लोरोएल्किल पदार्थ (पीएफएएस)  मानव-निर्मित रसायनों का एक समूह हैं।
इनका इस्तेमाल 1940 के दशक से तमाम उत्पादों को पानी, चिकनाई और दाग-धब्बों से बचाने के लिए किया जा रहा है।
ये पर्यावरण में आसानी से नष्ट नहीं होते और इंसानी शरीर में जमा होते जाते हैं, इसलिए इनसे कैंसर और बांझपन जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का खतरा रहता है।
रिपोर्ट्स से सामने आया है कि बच्चों की स्कूल यूनिफॉर्म में भी ये केमिकल्स हो सकते हैं। ये रसायन कपड़ों को वाटरप्रूफ और दाग-रोधी बनाने के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं। बच्चे इन कपड़ों को दिनभर पहनते हैं, जिससे त्वचा और सांस के माध्यम से इन रसायनों का संपर्क लगातार बना रहता है।
अध्ययन में क्या 
पता चला?
बीएमजे ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने साल 2001 से 2019 के बीच 20 से ज्यादा प्रकार के कैंसर के मामलों और इसे बढ़ाने वाले कारणों की की जांच की।
इसमें पाया गया कि 20 से 49 साल की उम्र के वयस्कों में अब 11 तरह के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। 
अकेले 2023 में ही इंग्लैंड में लगभग 31,000 वयस्कों में कैंसर का पता चला, जिनमें से लगभग दो-तिहाई मामले महिलाओं में थे।
धूम्रपान, शराब और शारीरिक गतिविधियों में कमी से कैंसर का खतरा बढ़ने का जोखिम बढ़ता है। शोधकर्ताओं ने कई और जोखिम कारक भी हैं जिनपर हमारा कम ध्यान जाता है।
पीएफएएस से बढ़ता जानलेवा खतरा
विशेषज्ञों ने कहा, पीएफएएस जिसे हमेशा बने रहने वाले रसायन के रूप में जाना जाता है, ये कैंसर का खतरा बढ़ाता जा रहा है। इसका उपयोग नॉन-स्टिक पैन से लेकर वाटरप्रूफ कपड़ों और खाद्य पैकेजिंग तक हर चीज में किया जाता है। बच्चों के स्कूली कपड़ों में भी इसकी पहचान की गई है। इसके अलावा नॉन स्टिक पैन, प्लास्टिक की बोतलें और जिन चीजों में हम खाना पैक कराके लाते हैं उनसे भी खतरा हो सकता है।
एंटीबायोटिक दवाओं की हाई डोज और इनका बहुत ज्यादा इस्तेमाल भी खतरनाक है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यूपीएफएस, पीएफएएस और एंटीबायोटिक्स ये सभी आंतों के माइक्रोबायोम को प्रभावित करते। इस संतुलन में गड़बड़ी शरीर में कैंसर से जुड़े बदलावों को जन्म दे सकती है।

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