भिलाई, 19 अप्रैल 2026। ‘लालच बुरी बला है’ ये कहावत BSP के एक रिटायर्ड कर्मचारी पर सटीक बैठी। 15 लाख की कार जीतने के लालच में बुजुर्ग ने 1 करोड़ रुपए गंवा दिए*। *साइबर ठगों ने लॉटरी का झांसा देकर 6 महीने तक किस्तों में पैसे ऐंठते रहे।
कैसे फंसे जाल में: रिटायर्ड कर्मचारी ने कुछ महीने पहले TV पर एक दवाई का विज्ञापन देखा। ऑनलाइन ऑर्डर करने के लिए दिए गए नंबर पर कॉल किया। यहीं से मोबाइल नंबर ठगों के हाथ लग गया।
ठगी का पैटर्न: कुछ दिन बाद अनजान नंबर से कॉल आया- ‘सर, बधाई हो! आपने जो दवाई मंगाई थी, उसकी कंपनी की लॉटरी में आपकी 15 लाख की कार निकली है।’ कार रिलीज कराने के लिए पहले 25 हजार प्रोसेसिंग फीस मांगी।
एक के बाद एक बहाना: बुजुर्ग ने पैसे भेज दिए। फिर GST, RTO चार्ज, इंश्योरेंस, इनकम टैक्स क्लीयरेंस के नाम पर बार-बार पैसे मांगे गए*। ठगों ने *फर्जी कागजात, कार की फोटो भेजकर भरोसा जीता। ‘आखिरी किस्त’ का झांसा देकर 6 महीने में कुल 1 करोड़ रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
कैसे खुला राज: जब ठगों ने और 10 लाख मांगे तो बुजुर्ग को शक हुआ। बेटे को बताया तब जाकर ठगी का पता चला*। कार तो दूर, *एक रुपए भी वापस नहीं आया।
पुलिस में शिकायत: पीड़ित ने साइबर थाने में केस दर्ज कराया है। बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच शुरू हो गई है। पुलिस का कहना है- ‘लॉटरी, इनाम, केबीसी के नाम पर आने वाले कॉल 100% फर्जी होते हैं।’
सबक क्या:
TV-ऑनलाइन दवाई, प्रोडक्ट के लिए नंबर शेयर करने से बचें।
*कोई कंपनी कार/पैसा जीतने पर आपसे पैसे नहीं मांगती*।
*अनजान कॉल पर तुरंत OTP, बैंक डिटेल, पैसा ट्रांसफर न करें*।
घर के बुजुर्गों को साइबर ठगी के बारे में जागरूक करें।

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