‘बोली पर भेदभाव’: ‘सरगुजिहा’ बोलने पर स्वरंग किड्स एकेडमी ने बच्चे को एडमिशन देने से किया इनकार | DEO का नोटिस- ‘क्यों न स्कूल बंद कर दें?’

अंबिकापुर। शिक्षा के मंदिर में बोली के नाम पर भेदभाव का शर्मनाक मामला सामने आया है। स्वरंग किड्स एकेडमी ने एक बच्चे को सिर्फ इसलिए एडमिशन देने से इनकार कर दिया क्योंकि वह ‘सरगुजिहा’ बोली बोलता था।

क्या है मामला: परिजन बच्चे का एडमिशन कराने स्कूल पहुंचे थे। बातचीत में पता चला कि बच्चा सरगुजिहा बोलता है। आरोप है कि इसके बाद *स्कूल प्रबंधन ने दाखिला देने से मना कर दिया*।

DEO ने लिया संज्ञान: मामले की शिकायत मिलते ही DEO ने स्वरंग किड्स एकेडमी को नोटिस थमा दिया। नोटिस में सख्त लहजे में पूछा गया है कि “क्यों न आपके स्कूल की मान्यता रद्द कर संस्था बंद कर दी जाए?” शिक्षा का अधिकार सबको है, बोली के आधार पर भेदभाव अस्वीकार्य है।

दूसरे स्कूल ने दिखाई मिसाल: जहां एक स्कूल ने दरवाजा बंद किया, वहीं दूसरे निजी स्कूल ने इंसानियत दिखाते हुए बच्चे को फ्री में प्रवेश दे दिया। स्कूल ने कहा- “बच्चा किसी भी बोली का हो, शिक्षा उसका हक है।”

बड़ा सवाल: क्या निजी स्कूल अब भाषा और क्षेत्र के आधार पर बच्चों को बांटेंगे? RTE एक्ट के तहत किसी भी बच्चे को प्रवेश से इनकार नहीं किया जा सकता।

आगे क्या: DEO ने 3 दिन में जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर मान्यता रद्द करने की कार्रवाई होगी।

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