जांच में आरोप है कि राजकुमार नायडू ने परिसमापक रहते हुए भैरव गृह निर्माण समिति और राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) गृह निर्माण समिति में गंभीर अनियमितताएं कीं, जिससे दोनों समितियों को 4 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ।
EOW के अनुसार, पहले से आवंटित और पंजीकृत 13 प्लॉटों का पंजीयन निरस्त कर नए सदस्यों को शामिल किया गया और उन्हीं प्लॉटों को कम कीमत पर बेच दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि नियमों के विपरीत एक ही परिवार के तीन सदस्यों को प्लॉट आवंटित किए गए।
मामले में एक सदस्य से प्लॉट की पूरी राशि लेने के बावजूद उसी भूखंड का पंजीयन किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर किए जाने का भी आरोप है। इसके अलावा प्लॉट बिक्री से प्राप्त रकम और समिति के बैंक खाते से निकाली गई 20 लाख रुपए से अधिक की राशि का निजी उपयोग किए जाने की बात जांच में सामने आई है, जिसे एजेंसी ने गबन माना है।
EOW-ACB का दावा है कि विस्तृत जांच में अनियमितताओं और वित्तीय नुकसान के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। इसी आधार पर आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और गबन से जुड़े प्रकरणों में विशेष अदालत में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया है। मामले की आगे की सुनवाई अदालत में होगी।

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